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जो नहीं फंसे हैं उनको फंसाना है

हरिशंकर व्यास

पिछले दिनों जब नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ा तो सोशल मीडिया में यह पोस्ट दिखाई दी कि अब केंद्र सरकार और भाजपा के पास सिर्फ एक सहयोगी बची है, जिसका नाम है ईडी! बहरहाल, पूरे देश में ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई को दौड़ाने के बाद भी कई नेता ऐसे हैं, जो अभी तक इन एजेंसियों की जाल में फंसने से बचे हुए हैं। तभी इन नेताओं के आसपास जाल फेंका जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि इसका मकसद छोटी-बड़ी किसी भी मछली को फांसना है ताकि उन नेताओं तक पहुंचा जा सके, जो अभी तक बचे हुए हैं। इसकी सबसे अच्छी मिसाल केरल की है। वहां प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने फेमा का एक केस बनाया है, जिसमें सीपीएम के बड़े नेता और पिछली सरकार में वित्त मंत्री थॉमस आईजैक को फंसाने का प्रयास चल रहा है। उनको ईडी ने कई नोटिस भेजे हैं और एक नोटिस में तो उनकी निजी संपत्ति का ब्योरा मांगा गया है। इसके खिलाफ जब वे अदालत गए तो हाई कोर्ट ने ईडी को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे लोगों की निजता का सम्मान करना चाहिए? वह कैसे किसी की संपत्ति का ब्योरा मांग सकती है।

सोचें, ईडी ने किसी भी नोटिस में उनको आरोपी नहीं बनाया है। यहां तक कि ईडी ने यह भी कहा है कि उनको गवाह के तौर पर बुलाया जा रहा है। अब अगर वे गवाह के तौर पर बुलाए जा रहे हैं तो उनकी संपत्ति का ब्योरा क्यों चाहिए? जाहिर है कि एजेंसी के पास कोई खास सबूत या आरोप नहीं हैं लेकिन जाल डालना है कि क्या पता कुछ फंस जाए तो वामपंथी नेताओं को भी भ्रष्ट करार दिया जाए। यह मामला केरल इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड का है, जिसने विदेशी कंपनियों के जरिए 21 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए हैं। उसमें फेमा नियमों के उल्लंघन की जांच ईडी कर रही है। इतना ही नहीं कई केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त अरब अमीरात से सोने की तस्करी के मामले में मुख्यमंत्री पी विजयन की जांच में भी लगी हैं। हालांकि अभी तक कामयाबी नहीं मिली है।

ऐसे ही तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के कई नेता केंद्रीय एजेंसियों की जाल में हैं। कनिमोझी से लेकर ए राजा और मारन परिवार के खिलाफ मामले हैं। लेकिन खुद स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कोई खास मामला अभी नहीं मिला है। पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु में आयकर विभाग के छापे बढ़ गए हैं। दो अगस्त को तमिल फिल्म उद्योग से जुड़े 10 से ज्यादा लोगों के 40 परिसरों पर आयकर विभाग ने छापा मारा। उससे पांच-छह दिन पहले 27 जुलाई को तमिलनाडु की रियल इस्टेट कंपनियों के ऊपर छापे मारे गए। उससे पहले 20 जुलाई को भी रियल इस्टेट कंपनियों और रेल व सडक़ के ठेके लेने वाली कंपनों के यहां तलाशी अभियान चला था। ध्यान रहे आमतौर पर काले धन का निवेश रियल इस्टेट कंपनियों और फिल्म उद्योग में किया जाता है। स्टालिन के बेटे उदयनिधि तमिल फिल्म उद्योग से जुड़े हुए भी हैं। सो, फिल्मी हस्तियों, निर्माताओं, डिस्ट्रीब्यूटर्स आदि के यहां छापों को लेकर माना जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसियां कुछ सूत्र तलाश रही हैं ताकि बड़े नेताओं तक पहुंचा जा सके।

स्टालिन की तरह तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी अभी तक केंद्रीय एजेंसियों की जांच से बचे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं के बयानों से ऐस लग रहा है कि उनके खिलाफ भी शिकंजा कस रहा है। पिछले दिनों जब कांग्रेस ने ईडी को दिए गए असीमित अधिकार और उसकी कार्रवाइयों का विरोध किया तो चंद्रशेखर राव ने कांग्रेस का समर्थन किया था। इसे लेकर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने कहा कि जल्दी ही के चंद्रशेखर राव और उनका परिवार भी ईडी की जांच झेलेगा। आमतौर पर ईडी की कार्रवाई की शुरुआत ऐसी ही होती है। प्रदेशों में भाजपा के नेता पहले ही बयान देकर बता देते हैं कि कार्रवाई होने वाली है। बहरहाल, बंदी संजय कुमार के बयान के कुछ दिन केंद्र सरकार के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तेलंगाना के दौरे पर गए तो उन्होंने कहा कि अगर चंद्रशेखर राव के परिवार ने कुछ गड़बड़ी नहीं की है तो ईडी या सीबीआई से डरने की क्या जरूरत है। इससे भी संकेत मिल रहा है कि जल्दी ही केंद्रीय एजेंसियां वहां भी जाने वाली हैं।

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